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सुदामा चरित्र हमें सिखाता है, निस्वार्थ होती है सच्ची मित्रता -उपमन्युजी

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एडिटर/संपादक:-तनीश गुप्ता,खण्डवा

सुदामा चरित्र हमें सिखाता है, निस्वार्थ होती है सच्ची मित्रता -उपमन्युजी

खाटू श्याम मंदिर परिसर रामनगर में आयोजित भागवत कथा का हुआ समापन,

खंडवा।। श्री खाटू श्याम मंदिर परिसर रामनगर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के अंतिम दिवस वृंदावन से पधारे कथा व्यास पंडित बनवारी भाई उपमन्युजी महाराज ने सुदामा और कृष्ण की मित्रता का वर्णन किया गया। उन्होंने कहा कि कैसे कृष्ण ने सुदामा की मदद की। सुदामा एक गरीब ब्राह्मण थे, जबकि कृष्ण द्वारिका के राजा थे। गरीबी के बावजूद, सुदामा हमेशा कृष्ण के ध्यान में रहते थे और उनकी भक्ति करते थे। कृष्ण और सुदामा बचपन के मित्र थे। वे दोनों सांदीपनी ऋषि के आश्रम में साथ पढ़ते थे। सुदामा की पत्नी सुशीला ने उन्हें द्वारिका में कृष्ण से मिलने जाने के लिए कहा, क्योंकि उन्हें विश्वास था कि कृष्ण उनकी मदद करेंगे। जब सुदामा द्वारिका पहुंचे, तो कृष्ण ने उन्हें नंगे पैर दौड़कर गले लगाया। उन्होंने सुदामा को अपने सिंहासन पर बैठाया और उनके चरण धोए। रुक्मिणी ने कृष्ण से कहा कि सुदामा को कुछ भी देने से पहले, वे अपनी प्रजा और स्वयं की संपत्ति के बारे में सोचें। कृष्ण ने सुदामा को दो मुट्ठी चावल देकर उन्हें घर भेजा और कहा कि सुदामा को अपनी गरीबी के कारण कुछ भी नहीं मिला, लेकिन उन्हें कृष्ण का प्रेम और मित्रता मिली। जब सुदामा घर लौटे, तो उन्होंने पाया कि कृष्ण ने उनकी गरीबी दूर कर दी थी और उन्हें एक सुंदर घर और संपत्ति दी थी। समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि रामनगर में आयोजित कथा का समापन मंगलवार को हुआ, वृंदावन से पधारे बनवारी भाई उपमन्यु जी ने सात दिनों तक बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं को संगीतमय कथा के माध्यम से रसपान कराया, पंडित उपमन्यु जी ने कथा समापन पर कहा कि सुदामा और कृष्ण की मित्रता एक आदर्श उदाहरण है कि सच्ची मित्रता कैसे निभाई जाती है। सुदामा ने कृष्ण के पास होते हुए भी उनसे कुछ नहीं मांगा, जबकि कृष्ण ने सुदामा की मदद की। सुदामा चरित्र हमें सिखाता है कि सच्ची मित्रता निस्वार्थ होती है। भगवान की भक्ति से सभी दुखों का निवारण होता है। भगवान की कृपा भक्तों पर हमेशा रहती है। गरीबी में भी भगवान का ध्यान रखना चाहिए। मंगलवार को हवन पूर्णाहुति के साथ कथा का समापन हुआ। कथा समापन पर कथा के मुख्य यजमान दिलीप पाटिल मेघा पाटिल ने पंडित जी का स्वागत अभिनंदन करते हुए सभी श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया।

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